
मैंने संचित किये हैं ...
यादों के समंदर से कुछ मोती
पिरोये हैं समय की माला में
जपती रहती हूँ ..
जागते रहने पर
या रहती हूँ सोती |
किसी मोती पर आ के
रुक जाती है अंगुली
मैं खो जाती हूँ
कभी अकारण हंसती हूँ ...और कभी रहती हूँ रोती
मैंने संचित किये हैं ... यादों के समंदर से कुछ मोती
1 comment:
कभी अकारण हंसती हूँ ...और कभी रहती हूँ रोती
मैंने संचित किये हैं ... यादों के समंदर से कुछ मोती
bahut khoobsoorat hai yado ke moti .
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