ये आंसुओं की सौगात मुझे दे दो
तुम्हारी आंखे नम हो ये मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम अपने सारे ग़म सुना दो ना मुझको
तुम्हारी पेशानी पे ये बल मुझे अच्छा नहीं लगता
देखो होठो पे हंसी आई है ,उम्मीदों की नन्ही लहर छाई है
अब खुदा पे एतबार हो कम ये मुझे अच्छा नहीं लगता
जो लगाये थे बड़ी उम्मीद से
जो लगते थे मनमीत से
उन्ही दरख्तों उन यूँ काटना मुझे अच्छा नहीं लगता ||
Friday, 14 May 2010
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