यह कविता नव-युगल दंपत्ति के क्षणिक आवेश को देख कर लिखी...
वे शायद पति पत्नी के रिश्ते की गहरायी को अभी समझ नहीं पाए हैं ...
इन रिश्तो की शुरुवात थोड़ी कठिन है... पर आगे राह सरल है...
तुम्हे याद करते करते
अकेलेपन ने मुझे मुस्कराहट दी .. और कहा -
साथ रहोगे ... तो हँसोगे
तुहारी यादों ने अकेलेपन में
मुझे उदास किया ... और कहा -
साथ रहोगे तो ... कंधे पर सिर रख कर रो लोगे
तुहारी याद में मैंने कईं गीत गुनगुनाए
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो मुक्त होकर गाओगे
तुम्हे याद करते करते
ना सो पाए सारी रात
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो घोड़े बेच कर सो जाओगे ॥
Friday, 14 May 2010
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1 comment:
sath rhne ke kai fayde hai par sab akele rhna chahte hai .
achhi prerk kvita .
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