Friday, 14 May 2010

तुम और मैं

तुम वट-वृक्ष ..मैं लता
तुम पवन मैं पताका

तुम सूर्य मैं रोशनी
तुम चाँद में चांदनी

तुम दीपक मैं बाती
तुम राह मैं साथी

तुम बीज मैं खलिहान
तुम शंका मैं समाधान ॥

2 comments:

शोभना चौरे said...

ममता जी
बहुत सुन्दर उपमाओ से अलंकृत है आपकी ये रचना |
बधाई

Ankita Billore said...

mami awesomely written :)