रिश्ते कोई घास के पुले नही,
अंगारा मिला धुआं किया
और बुझ गये |
रिश्ते सूखे वृक्ष का मोटा डूंड है
आग पकड़ी ,प्रकाश दिया ..ऊर्जा दी,
धीरे धीरे अंत तक अंगार देते रहे
गर्माहट मिलती रही ॥
रिश्तो के रस्सी पर गांठ लगेगी
कोई बात नहीं
कोई न कोई खोल देगा
पर दुःख की बात तो यह है ... रस्सी भी तो छोटी हो जाएगी ||
Saturday, 23 January 2010
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