इस जीवन के साज़ को मौन नहीं आवाज़ दो
थम लेंगे बांह तुम्हारी
थोडा सा विश्वास दो
आस निराश का ताना -बना
कभी सुगम कभी पथ अनजाना
कदमो को थोडा सा मंज़िल का
एहसास दो
सहज-सरल है जीवन अपना
सच होगा देखा जो सपना
बुझी आंच को ऊष्मा का एहसास दो
Wednesday, 1 September 2010
Friday, 14 May 2010
अच्छा नहीं लगता
ये आंसुओं की सौगात मुझे दे दो
तुम्हारी आंखे नम हो ये मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम अपने सारे ग़म सुना दो ना मुझको
तुम्हारी पेशानी पे ये बल मुझे अच्छा नहीं लगता
देखो होठो पे हंसी आई है ,उम्मीदों की नन्ही लहर छाई है
अब खुदा पे एतबार हो कम ये मुझे अच्छा नहीं लगता
जो लगाये थे बड़ी उम्मीद से
जो लगते थे मनमीत से
उन्ही दरख्तों उन यूँ काटना मुझे अच्छा नहीं लगता ||
तुम्हारी आंखे नम हो ये मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम अपने सारे ग़म सुना दो ना मुझको
तुम्हारी पेशानी पे ये बल मुझे अच्छा नहीं लगता
देखो होठो पे हंसी आई है ,उम्मीदों की नन्ही लहर छाई है
अब खुदा पे एतबार हो कम ये मुझे अच्छा नहीं लगता
जो लगाये थे बड़ी उम्मीद से
जो लगते थे मनमीत से
उन्ही दरख्तों उन यूँ काटना मुझे अच्छा नहीं लगता ||
तुम और मैं
तुम वट-वृक्ष ..मैं लता
तुम पवन मैं पताका
तुम सूर्य मैं रोशनी
तुम चाँद में चांदनी
तुम दीपक मैं बाती
तुम राह मैं साथी
तुम बीज मैं खलिहान
तुम शंका मैं समाधान ॥
तुम पवन मैं पताका
तुम सूर्य मैं रोशनी
तुम चाँद में चांदनी
तुम दीपक मैं बाती
तुम राह मैं साथी
तुम बीज मैं खलिहान
तुम शंका मैं समाधान ॥
यादों का समंदर
अकेलापन
यह कविता नव-युगल दंपत्ति के क्षणिक आवेश को देख कर लिखी...
वे शायद पति पत्नी के रिश्ते की गहरायी को अभी समझ नहीं पाए हैं ...
इन रिश्तो की शुरुवात थोड़ी कठिन है... पर आगे राह सरल है...
तुम्हे याद करते करते
अकेलेपन ने मुझे मुस्कराहट दी .. और कहा -
साथ रहोगे ... तो हँसोगे
तुहारी यादों ने अकेलेपन में
मुझे उदास किया ... और कहा -
साथ रहोगे तो ... कंधे पर सिर रख कर रो लोगे
तुहारी याद में मैंने कईं गीत गुनगुनाए
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो मुक्त होकर गाओगे
तुम्हे याद करते करते
ना सो पाए सारी रात
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो घोड़े बेच कर सो जाओगे ॥
वे शायद पति पत्नी के रिश्ते की गहरायी को अभी समझ नहीं पाए हैं ...
इन रिश्तो की शुरुवात थोड़ी कठिन है... पर आगे राह सरल है...
तुम्हे याद करते करते
अकेलेपन ने मुझे मुस्कराहट दी .. और कहा -
साथ रहोगे ... तो हँसोगे
तुहारी यादों ने अकेलेपन में
मुझे उदास किया ... और कहा -
साथ रहोगे तो ... कंधे पर सिर रख कर रो लोगे
तुहारी याद में मैंने कईं गीत गुनगुनाए
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो मुक्त होकर गाओगे
तुम्हे याद करते करते
ना सो पाए सारी रात
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो घोड़े बेच कर सो जाओगे ॥
Saturday, 23 January 2010
रिश्ते
रिश्ते कोई घास के पुले नही,
अंगारा मिला धुआं किया
और बुझ गये |
रिश्ते सूखे वृक्ष का मोटा डूंड है
आग पकड़ी ,प्रकाश दिया ..ऊर्जा दी,
धीरे धीरे अंत तक अंगार देते रहे
गर्माहट मिलती रही ॥
रिश्तो के रस्सी पर गांठ लगेगी
कोई बात नहीं
कोई न कोई खोल देगा
पर दुःख की बात तो यह है ... रस्सी भी तो छोटी हो जाएगी ||
अंगारा मिला धुआं किया
और बुझ गये |
रिश्ते सूखे वृक्ष का मोटा डूंड है
आग पकड़ी ,प्रकाश दिया ..ऊर्जा दी,
धीरे धीरे अंत तक अंगार देते रहे
गर्माहट मिलती रही ॥
रिश्तो के रस्सी पर गांठ लगेगी
कोई बात नहीं
कोई न कोई खोल देगा
पर दुःख की बात तो यह है ... रस्सी भी तो छोटी हो जाएगी ||
Tuesday, 6 October 2009
कर्म बगिया में नज़र पड़ी एक सुरभित पुष्पों से आच्छादित वृक्ष पर
वायु प्रसारित करती रही गंध
अतीत में जाने पर स्मरण आया के ये तो वे पुष्प है जिनके बीज तो
मेरे माता -पिता ने ही मेरे लिए बोए थे
आशीर्वाद इन बीजो का नाम
ओर ये देखो लगाओ हाथ, कितने कोमल है ये पाट
ये वो बीज है जिन्हे मैने जाने अंजाने मे किसी की
वैचारिक या टन मान धन से मदद क़ी
उन्होने दिए थे ये''धर्म -दान के बीज ''
अब उगे ये
एक नन्ही बेल धीरे -धीरे बढ़ी
एक कर्म व्रक्ष पर चढ़ि
अरे इन्हे हाथ मत लगाना
ये पौधे ये पाट-ये पुष्प
विचित्र है बड़ी पीड़ा है इनके स्पर्श मे
ये पीड़ा कोई हर नही सकता
ना भागवत भजन ना कोई जतन
एक जानकार माली ने बताया-
साहब ये बीज आपने ही किसी -किसी को दिए थे
थोड़े आपके पाले मे भी गिरे थे
जानकार माली ने इसे'' कष्ट के बीज '' नाम देते हुए कहा-
कई प्रकार का होता हे ये पौधा साहब
ओर ये पेड़ मुझे ही नही
मेरी बगिया मे आने वेल
हर एक अतिथि को पसंद है
इस पर मीठी बोलती हे कोयल
कभी किसी डाली पे गाता हे तोता
ये ''सुवचन' बीज का व्रक्ष है
देखो डोर एक'' कुवचन ''बीज का भी व्रक्ष है
बिल्कुल ठूंठ खड़ा है
कोने मे अकेला पड़ा है
केवल कौवा परिवार अपने इष्ता मित्रो के
साथ आता है कार्काश धवानी मे गाता है
इस पेड़ को देखो
घाना-घाना शाखो -पाटो से भरा -भरा
हरकच चायादार
ये नीम का पेड़ है
जानकार माली इसे बड्डपन के बीज का पेड़ बताते हैं
वायु प्रसारित करती रही गंध
अतीत में जाने पर स्मरण आया के ये तो वे पुष्प है जिनके बीज तो
मेरे माता -पिता ने ही मेरे लिए बोए थे
आशीर्वाद इन बीजो का नाम
ओर ये देखो लगाओ हाथ, कितने कोमल है ये पाट
ये वो बीज है जिन्हे मैने जाने अंजाने मे किसी की
वैचारिक या टन मान धन से मदद क़ी
उन्होने दिए थे ये''धर्म -दान के बीज ''
अब उगे ये
एक नन्ही बेल धीरे -धीरे बढ़ी
एक कर्म व्रक्ष पर चढ़ि
अरे इन्हे हाथ मत लगाना
ये पौधे ये पाट-ये पुष्प
विचित्र है बड़ी पीड़ा है इनके स्पर्श मे
ये पीड़ा कोई हर नही सकता
ना भागवत भजन ना कोई जतन
एक जानकार माली ने बताया-
साहब ये बीज आपने ही किसी -किसी को दिए थे
थोड़े आपके पाले मे भी गिरे थे
जानकार माली ने इसे'' कष्ट के बीज '' नाम देते हुए कहा-
कई प्रकार का होता हे ये पौधा साहब
ओर ये पेड़ मुझे ही नही
मेरी बगिया मे आने वेल
हर एक अतिथि को पसंद है
इस पर मीठी बोलती हे कोयल
कभी किसी डाली पे गाता हे तोता
ये ''सुवचन' बीज का व्रक्ष है
देखो डोर एक'' कुवचन ''बीज का भी व्रक्ष है
बिल्कुल ठूंठ खड़ा है
कोने मे अकेला पड़ा है
केवल कौवा परिवार अपने इष्ता मित्रो के
साथ आता है कार्काश धवानी मे गाता है
इस पेड़ को देखो
घाना-घाना शाखो -पाटो से भरा -भरा
हरकच चायादार
ये नीम का पेड़ है
जानकार माली इसे बड्डपन के बीज का पेड़ बताते हैं
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