विचारो का जंगल
कही हरीतिमा कंही बंजर|
वो देखो कोयल कूकी
हरी डाल देख, जो
कल तकथीसूखी |
वो देखो नाचा मोर
मन में उसके उठा
है शोर|
वो देखो चिडिया चहकी
घटा को देखा ;
फुदकी ;बहकी
वो देखो ;बगुला भगत
गायों के पैरो का कीचड़
उसका जगत |
वो देखो हिरन की शोखी
कैसा मदमस्त ,हिरनिया की देख
मदहोशी |
Saturday, 23 May 2009
आकांक्षा
Wednesday, 8 October 2008
सरलमना
एक विचार
अपने आदर्श किसी पर थोपना बड़ा ही सरल
पर आदर्शो को मानना बड़ा कठिन
अपने आदर्श अपने जीते जी धराशाई होते है
इसलिए सहज बने रहो मेरे दोस्त
क्योंकि भगवान सहज हें सरलमना को सुलभ है
अपने आदर्श किसी पर थोपना बड़ा ही सरल
पर आदर्शो को मानना बड़ा कठिन
अपने आदर्श अपने जीते जी धराशाई होते है
इसलिए सहज बने रहो मेरे दोस्त
क्योंकि भगवान सहज हें सरलमना को सुलभ है
लोकगीत < विवाह में गाए जाने वाला एक मालवी - गणेश >
< विवाह में गाए जाने वाला एक मालवी - गणेश >
म्हारा घर रुकमनी जी रो ब्याव, गजानन आवे काज सरेगा
म्हारा घर रुकमनी जी रो ब्याव, गजानन आवे काज सरेगा|
शीश तमारो देवा , मोटेरो कहिये
तेल सिन्दूर चडेगा , गजानन आवे काज सरेगा|
आंख तमारी देवा, छोटेरी कहिये
झबलक दिव्लो बलेगा, गजानन आवे काज सरेगा|
सोंड तमारी देवा , मोटेरी कहिये
वासुगनाग रमेगा,गजानन आवे काज सरेगा|
दांत तमारा देवा,मोटेरा कहिये
सुवागन चुडलो पेरेगा,गजानन आवे काज सरेगा|
दोंद तमारी देवा, मोटेरी कहिये
सवा मन मोदक चडेगा,गजानन आवे काज सरेगा|
पांय तमारा देवा,मोटेरा कहिये
केलारा खंब नमेगा,गजानन आवे काज सरेगा|
Tuesday, 7 October 2008
अन्तरंग मित्रता
चमेली ने वर्षा से कहा ...
सखी, बीते दिनों मैं बहुत परेशां रही
कैसे???
पहले सूर्य तपा, अति तपा
फिर आंधियां चली
ऐसे चली की मैं बिखर बिखर गई
मेरी भुजाएं कहलाने वाली शाखाओं ने मेरा साथ छोड़ दिया..
मैं मैं ना रही..पर मैं घबरायी नही
क्यूंकि मुझे मालूम था कि तुम आओगी
स्नेह सांत्वना कि कुछ बूँदें मुझ पर गिरोगी
मैं फिर माटी में रम जाउंगी
अपने अस्तित्व को पा लूँगी
खूब पुष्पित हो कर मह्कुंगी
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