विचारो का जंगल
कही हरीतिमा कंही बंजर|
वो देखो कोयल कूकी
हरी डाल देख, जो
कल तकथीसूखी |
वो देखो नाचा मोर
मन में उसके उठा
है शोर|
वो देखो चिडिया चहकी
घटा को देखा ;
फुदकी ;बहकी
वो देखो ;बगुला भगत
गायों के पैरो का कीचड़
उसका जगत |
वो देखो हिरन की शोखी
कैसा मदमस्त ,हिरनिया की देख
मदहोशी |
Saturday, 23 May 2009
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