ये आंसुओं की सौगात मुझे दे दो
तुम्हारी आंखे नम हो ये मुझे अच्छा नहीं लगता
तुम अपने सारे ग़म सुना दो ना मुझको
तुम्हारी पेशानी पे ये बल मुझे अच्छा नहीं लगता
देखो होठो पे हंसी आई है ,उम्मीदों की नन्ही लहर छाई है
अब खुदा पे एतबार हो कम ये मुझे अच्छा नहीं लगता
जो लगाये थे बड़ी उम्मीद से
जो लगते थे मनमीत से
उन्ही दरख्तों उन यूँ काटना मुझे अच्छा नहीं लगता ||
Friday, 14 May 2010
तुम और मैं
तुम वट-वृक्ष ..मैं लता
तुम पवन मैं पताका
तुम सूर्य मैं रोशनी
तुम चाँद में चांदनी
तुम दीपक मैं बाती
तुम राह मैं साथी
तुम बीज मैं खलिहान
तुम शंका मैं समाधान ॥
तुम पवन मैं पताका
तुम सूर्य मैं रोशनी
तुम चाँद में चांदनी
तुम दीपक मैं बाती
तुम राह मैं साथी
तुम बीज मैं खलिहान
तुम शंका मैं समाधान ॥
यादों का समंदर
अकेलापन
यह कविता नव-युगल दंपत्ति के क्षणिक आवेश को देख कर लिखी...
वे शायद पति पत्नी के रिश्ते की गहरायी को अभी समझ नहीं पाए हैं ...
इन रिश्तो की शुरुवात थोड़ी कठिन है... पर आगे राह सरल है...
तुम्हे याद करते करते
अकेलेपन ने मुझे मुस्कराहट दी .. और कहा -
साथ रहोगे ... तो हँसोगे
तुहारी यादों ने अकेलेपन में
मुझे उदास किया ... और कहा -
साथ रहोगे तो ... कंधे पर सिर रख कर रो लोगे
तुहारी याद में मैंने कईं गीत गुनगुनाए
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो मुक्त होकर गाओगे
तुम्हे याद करते करते
ना सो पाए सारी रात
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो घोड़े बेच कर सो जाओगे ॥
वे शायद पति पत्नी के रिश्ते की गहरायी को अभी समझ नहीं पाए हैं ...
इन रिश्तो की शुरुवात थोड़ी कठिन है... पर आगे राह सरल है...
तुम्हे याद करते करते
अकेलेपन ने मुझे मुस्कराहट दी .. और कहा -
साथ रहोगे ... तो हँसोगे
तुहारी यादों ने अकेलेपन में
मुझे उदास किया ... और कहा -
साथ रहोगे तो ... कंधे पर सिर रख कर रो लोगे
तुहारी याद में मैंने कईं गीत गुनगुनाए
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो मुक्त होकर गाओगे
तुम्हे याद करते करते
ना सो पाए सारी रात
अकेलेपन ने कहा -
साथ रहोगे तो घोड़े बेच कर सो जाओगे ॥
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