Wednesday, 3 June 2009

लक्ष्मी - सरस्वती का आगमन

बात करीब चालीस- बयालीस वर्ष पहले की है | हम जुनी इंदौर में रहते थे जब मै छोटी थी |तब मेरे बाबूजी जब भी बाहर जाते ,कभी भी खालीहाथ घर नही आते ;चाहे वे नोकरी के लिए जाते या मिलने -जुलने | कभी चना -परमल कभी गीली मूंगफली , कभी जवार मक्काकी धानी कभी और कभी फुटाने| मोसमी फल तो पक्का| कभी लड्डूलाल की नमकीन चना दाल या मिक्चर| हाँ ....एक बात और याद आती है, उन दिनों सायकल के हँडलपर सूप में शेवंती की लालगुलाब लगी आठाने वाली वेणी भी लगाने को मिलती |समय बीतता गया मेरे विवाह के बाद वो प्रायःमेरे बच्चो से मिलने आते , पर अब भी खालीहाथ कभी नही| ये सब और न जाने कितनी बाते याद ऐसे आई -की कल टी वी पर एक सज्जन 'घर में लक्ष्मी कैसे आए 'अपने विचार बता रहे थे ;एक महत्वपूर्ण टिप देते हुए कहा --घर का ' मुखिया बाहर से घर में खाली हाथ कभी न आए ;चाहे वो घर के आँगन में लगे पेड़ की पत्ती ही क्यो न हो '|आज बाबूजी तो नही हैं , पर उनके और बाई [माँ] के आशीर्वाद से पुरे परिवार पर लक्ष्मी के साथ-साथ सरस्वती की महती कृपा है |ये माता -पिताके लगाये वृक्ष है , सम्यानंतरसे हम फल पाते हैं| मेरी आँखे ठंडे आंसुओ की धारा से नमन करतीहै|

4 comments:

शोभना चौरे said...

mamtaji

bhut khubsurt sansmaran .mere man ko bhiga kar diya .
ase sanskar hme sirf mata pita hi de skte hai .
badhai

अमिताभ श्रीवास्तव said...

maataa-pitaa ke liye jab bhi koi apna antarman gilaa kartaa he, mujhe lagtaa he ishvar he, ynhi he, jaroor he....///aour me uske saamne natmastak ho jataa hoo///

k.r. billore said...

mamtaaji, aapki sansamaran,hamee appnee atit ki yaad dila gayee ,kamana ,mumbai,,,

MPSTRC said...

mamta,
kya baat hai.....tumne yaado ke samander me duba diya....ab to kamoshi se BABUG ko yaad karte rahte hai......gre8