
दाता --
धूप दे या छाँव दे,
पथ दे या ठांव दे ,
राहत दे या घाव दे,
मुक्ति दे या तनाव दे,
तेरी मर्ज़ी दाता , ये मेरी अर्जी |
तट दे या बहाव दे,
शीत दे या अलाव दे,
रोक दे या घुमाव दे ,
लगाव दे या अलगाव दे
तेरी मर्ज़ी दाता , ये मेरी अर्जी |
(इमेज सोर्स- कोप्तिच्चुर्च .ओआरजी)
4 comments:
santosh hi sbse bda dhan hai
kuch yhi khti sundar rchna .
badhai
बहुत सुंदर...भाव से परिपूर्ण रचना..बहुत अच्छा लगा आप के ब्लाग पर आकर
dhanywad shobhanaji,prasannaji|
sunder bhao sunder aur sanchhipt shabdo me. bahut achchha laga.
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