Sunday, 7 June 2009

मेरी अर्जी



दाता
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धूप दे या छाँव दे,
पथ दे या ठांव दे ,
राहत दे या घाव दे,
मुक्ति दे या तनाव दे,
तेरी मर्ज़ी दाता , ये मेरी अर्जी |

तट दे या बहाव दे,
शीत दे या अलाव दे,
रोक दे या घुमाव दे ,
लगाव दे या अलगाव दे
तेरी मर्ज़ी दाता , ये मेरी अर्जी |
(इमेज सोर्स- कोप्तिच्चुर्च .ओआरजी)

4 comments:

शोभना चौरे said...

santosh hi sbse bda dhan hai
kuch yhi khti sundar rchna .
badhai

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' said...

बहुत सुंदर...भाव से परिपूर्ण रचना..बहुत अच्छा लगा आप के ब्लाग पर आकर

Mamta Sharma said...

dhanywad shobhanaji,prasannaji|

Anonymous said...

sunder bhao sunder aur sanchhipt shabdo me. bahut achchha laga.