एक विचार
अपने आदर्श किसी पर थोपना बड़ा ही सरल
पर आदर्शो को मानना बड़ा कठिन
अपने आदर्श अपने जीते जी धराशाई होते है
इसलिए सहज बने रहो मेरे दोस्त
क्योंकि भगवान सहज हें सरलमना को सुलभ है
Wednesday, 8 October 2008
लोकगीत < विवाह में गाए जाने वाला एक मालवी - गणेश >
< विवाह में गाए जाने वाला एक मालवी - गणेश >
म्हारा घर रुकमनी जी रो ब्याव, गजानन आवे काज सरेगा
म्हारा घर रुकमनी जी रो ब्याव, गजानन आवे काज सरेगा|
शीश तमारो देवा , मोटेरो कहिये
तेल सिन्दूर चडेगा , गजानन आवे काज सरेगा|
आंख तमारी देवा, छोटेरी कहिये
झबलक दिव्लो बलेगा, गजानन आवे काज सरेगा|
सोंड तमारी देवा , मोटेरी कहिये
वासुगनाग रमेगा,गजानन आवे काज सरेगा|
दांत तमारा देवा,मोटेरा कहिये
सुवागन चुडलो पेरेगा,गजानन आवे काज सरेगा|
दोंद तमारी देवा, मोटेरी कहिये
सवा मन मोदक चडेगा,गजानन आवे काज सरेगा|
पांय तमारा देवा,मोटेरा कहिये
केलारा खंब नमेगा,गजानन आवे काज सरेगा|
Tuesday, 7 October 2008
अन्तरंग मित्रता
चमेली ने वर्षा से कहा ...
सखी, बीते दिनों मैं बहुत परेशां रही
कैसे???
पहले सूर्य तपा, अति तपा
फिर आंधियां चली
ऐसे चली की मैं बिखर बिखर गई
मेरी भुजाएं कहलाने वाली शाखाओं ने मेरा साथ छोड़ दिया..
मैं मैं ना रही..पर मैं घबरायी नही
क्यूंकि मुझे मालूम था कि तुम आओगी
स्नेह सांत्वना कि कुछ बूँदें मुझ पर गिरोगी
मैं फिर माटी में रम जाउंगी
अपने अस्तित्व को पा लूँगी
खूब पुष्पित हो कर मह्कुंगी
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